इजहार-ए-इश़्क
ये चाँद तारे तो मे नहीं तोड़ सकता ,किसी की हड्डियाँ तोड़ना है तो बोलो
झूठी कसमे वादे मे नहीं करता ,खुश रख सकता हूँ उम्र भर,अगर तुम रहना चाहते हो तो बोलो
वादा किय बगैर निभाया जा सकता हैं रिश्ता,मे साबित कर सकता हूँ ,मगर तुम तो बोलो
तेरे कारण तो नही पर तुम्हे मे जान दे सकता हूँ,मगर तुम अपनी हाथो से लेना चाहते हो तो बोलो
तेरे नखरे खर्चे तो मे उठा सकता हूँ
सुबह तुम मुझे प्यार से उठा सकते हो तो बोलो
ओर कहना अजी सुनते हो उठ भी जाओ
चाय ठंडी हो रही हैं उठकर पी लो
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